श्रृंगार पद
श्रृंगार पद
लूट लए अधर मेरे मन कौ।
छबि देखीहै जबहि मलूक,नैन दुई अधर ही टिकै जात।
रस बरसाते मानौ खैचत है,मेरौ हिय कौ अती ही बलात।
हिय धरकत है जिय डरपत है,रह रह जावै हिचकौल खात।
सरबस चोरन को चोर जेई,कोऊ बढके नाय जौ देवे मात।
आवत ऐसौ दबै पाम सखी,जैसौ बढी रैन कोऊ चौर आत।
ता पै बिनु या कौ सरतौ नाय,प्यारी या कौ ही दिन रैन च्हात।
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