कैसो बसिहौ
कैसौ बसिहौ
कैसौ बसिहौ ब्रज कौ धाम।
जप तप तीरथ कौन करिहै,बास पावै गौरी कौ गाम।
बसन गैरूआ तिलक भाल लौ,दैऊ केश मुंडाय तमाम।
अहो कहियौ जुग जौग रमावू,टूक मांगू घर घर गाम।
मौन होय तरू लताहि लिपटू,टेरू रौबत भौर लौ शाम।
कहौ तौ कछु जौरी हम सौ,प्यारी कौन बिधि जावै धाम।
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