सेज

सेज
बिखरीही सेज कैसौ हौ बिहारी।
चाँदी कौ सैजा,बिछिहै श्वेत झीनौ चदरा।
बिखरीहौ कुसुम,रस केलि बादै बिखरा।
सिराहनो हौहि नरमा,पडिहै सिल चदरा।
बिलसै दुई ज्यौ हौहि,दामिनी संगै बदरा।
रैनहु बिताई पीबतौ,पीबतौ अबहु न अघरा।
ऐसौ रसराज रसिकिनी,दरसहु ब्याकुल मौरा मनरा।

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