रहे अखंड

रहै अखण्ड दोउन को शीतलताई।
चंदन बनिकै लिपटै रहै आपस,अक्षय दोऊ कौ रस केलि सदाई।
बिरह ताप अति दुरूह नसावै,मिलन रितु कुंज रहै सदा छाई।
सीकर शीतल रस अंग झलकै,निरखि यौ अलिन परम सुख पाई।
मधुर बयार बनि बहै "प्यारी",अहा! लाल लली लए लाड लडाई।

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