दासी भाव

दासी भाव
जुगल जौरी सैब्य हमारौ,हम वाकौ सेवक दासी।
सैबा होय प्राण प्राण हौये,बिनु सैबा रहत उदासी।
धीर धरै काय बाबरै मनवा,रहै टेरत नित चकवासी।
बिछौह हौय चैन पलहु न पावै,पिय लैवत नाम सुधासी।
अजहु न टेरिहै नाम पिय प्यारी,हीरा जनम गवायौ विरथासी।

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