युगल एकत्व

युगल एकत्व
भई री जोरी घन सौ श्याम भई।
अंग अंग भरत दामिनी हौ,सहज दुई एक हई।
ज्यौ चपला घन बिलग न होये,त्यौ बिलग न करत जई।
रै मन भज तौ एक जानिहै,इन्ही लाड लडावन लई।
कहत बनत नाही मुख सौ,प्यारी आनंद हिय अती हई।

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