जावू बलिहार

जावू बलिहार
रमणा! सूरतिया जावू बलिहार।
श्यामल तन छबिली छबी,कुंडल शोभा अपार।
टेढो पगा शीश सजिहै,मछरी नैना कटार।
पग उपरि धरिहै पगा,टेढो सौ कटि कटिली।
कर कंकन शोभित सजीलै,अधर धरी मुरली।
सौ सौ नुपुर सजिहै पायन,एकौ धरै ऐकौ है खड्यौ।
मुस्कनि ऐसौ टौना मारिहौ,सुहावे है सोहणी बड्यौ।
मोर पखा पग उपरि लगिहै,मोतियन माल सजी।
गलहु माल सोहवै न्यारी,करधनी लटकन बंधी।
दरस करिहै ऐसौ सलौनौ रूप कौ,प्यारी बावरिया भयी।

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