चरण वंदन

चरण वंदन
भज मन चरण कमल सुखदाई।
जिन्ह पग सेवत रमा उर ब्रह्मा,सुर सनकादि ध्याई।
शेष महेश गुणगन गावत,वेद हि पार न पाई।
सखियन सेवित कुंजन चरणा,बारि बारि बली जाई।
सुंदर सुकोमल साजत चरणा,पैंजनिया सो सजाई।
बंदौ चरण कमल ऐसौ प्यारी,लौटत चरणन ताई।

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