सेवा अभिलाष
सेवा अभिलाष
मौहै राखिहौ निज सेवाहु प्यारै।
बनाय मोय राखो बंशी अधर कौ,राधा राधा सुनावू तौहै।
या च्ह्यौ लटकन मुकुट बनावौ,उरझू अलक लली कौ है।
नैनन कजरा रेख बनाय लऔ,राधा ही निहौरा करिहौ।
पीत पितांबर या पटा बनाय लौ,उडि उडि चुनर उरझ्यौ।
पग पायल कौ नुपुर करिहौ,राधा दई ताल नचिहौ।
कछु न कछु प्यारी करही लीजौ,बिनती चरण करिहौ।
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