कहाँ सो पाऊ

कहाँ सो पाउ
भाव कहाँ सो पाउ।
बिषय कुभाव मैल भरा हिय,कैसौ टेर लगाउ।
प्रीत न किन्ही कबहु साँची,माधव किस विध पाउ।
हिय कठोर पाथर सम होया,उपजत भाव न लाउ।
छूयो प्राण करिहौ भावमय,चरणन टेर लगाउ।
आस भरोस एकौ आपको,प्यारी प्रीती बलिहि जाउ।

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