निकुँज शोभा पद
निकुंज शोभा पद
निरख सखी रंग कक्ष शोभा।
खुलत पट ही जावत देखी,मिल सखियन संग जाती।
द्वार सम्मुख दर्पण अरू चौकी,जोरी श्रृंगार करत हाती।
दहिनी ओर जावत ही देखिहौ,सैज सजी पिय प्यारी।
ता के बाम निरख लीजियौ जी,चौकी बीरी अरू झारी।
सेज सजे अरी निरख लयी,जोरी ओढत ही रजाई।
भई भौर सखि प्यारी सब मिल,जुगल जोरी जगावन आयी।
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