ब्रज प्रणाम

ब्रज प्रणाम
अहा! ब्रज प्रणमऊ बारम्बार।
जा मे वास करन संहारक ललचै,ललचै रचनाकार।
जा रज शीश चढावन च्हावै,शुक सनकादिक व्यास।
रोबत ब्रह्मा लछमी मांगे,ऐई ब्रज धाम को वास।
नारद नित वीणा मे सुमिरै,जाकी महिमा आठो याम।
ऐसेहु ब्रज प्यारी वास दीजिहौ,पावै शीश ब्रज कौ धाम।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया