प्रेम कीबात
प्रेम की बात
बात सखी प्रेम की थोरी ना बहुत।
प्रेम प्रेम जपिहै प्रेम नाय जानिहै,ऐसेहु जगत मा फिरिहै सबहि।
जावे सबै आवे प्रेम बचिहै न कछु,बिनु पीय कछु भावे न तबहि।
दीखे चहु ओर पीय प्राण ही प्यारौ,जानिहै गयो संग आयो पिय तबहि।
कौन वा की सुधि लेय राखिहै कौन वा कौ,दिखिहै प्रेम को फूल दिशि सबहि।
प्यारी कही सुनी बाता कहवै बिनु बात,जानिहै न कछु बात प्रेम को जबहि।
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