अभिलाषा

अभिलाषा
माई मेरो गठजौडा कीजौ।
सुनियौ रूप अनूप पहिलौ,कर कोऊ को नाय दीजौ।
मटकन नट कौ अलकन रस कौ,नैना बस नाय रहियौ।
हसवन लूट्यौ चितवन मारौ,अरी बोलन फूल झरियौ।
अंग टौना री रूप सलौना,कौन उपमा रूप धरिहौ।
ज्यौ री तौ देखै रह नाहि पावै,प्यारी बिनती माय मिलिहौ।

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