प्रतीक्षा
प्रतिक्षा
थारी जोहवत थक गई बाट।
नाहि आपु ना संदेशो आवै,सूनु आवन को नाय बात।
दिवस न दैख्यौ जबसौ सिधारौ,जुग सम भई कारी रात।
मात तात मोय सबु समुझावै,कोऊ पूछे न हिय की बात।
सूख्यौ रोग लग्यौ देहि को,जरै चूल्हौ सम ही गात।
जीवत बचते आवेगा दिन,पूछै मिलन को प्यारी बात।
Comments
Post a Comment