निराशा

निराशा
हू न कबीरा नाय मीरा,दाँसी साँवल कौ री।
भटकू भूलू बिसरू जग मा,करनौ ब्रज ही बास री।
हसू रोवू नैना खौवू चाहै,रहनौ चरणा पास री।
गुण अवगुण सब अर्पण किन्है,दीजौ या करियौ नास री।
दासी कर ही रखियौ मोय,प्यारी जनम जनम को प्यास री।

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