हा हा खात
हा हा खात
हा हा खात घनश्याम।
देखी मानवती राधिकै,मनावन करै उपाम।
कर जौरै पायन परै,पग धरै शीश ललाम।
नेक निरख लयौ प्यारीजु,चित्त अौगुन नाय धरौ।
कैसेहु धीरज धरौ रहू,बिनु दैखै नाय सरौ।
पुनि पुनि चिबुक पलोटिहै,पुनि शीश चरण गिरायै।
तज दीजौ मान नेक लाडली,प्यारी बचन याद दिलायै।
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