बिहारिजु प्राकट्य
बिहारीजु प्राक्ट्य
बाँटत बधाई निधिबन हरिदास जु।
बिहार पंचमी शुभ तिथी भारी,प्रकट भई जोरी ऐकौ रूप हु।
चला रै हिय उडि जा निधबन,हर्षित भए युगल संग दास जु।
लुटावत नेह अजु तौ हु लुटा रै,बाँकी छबी हिय काढ चढाय दु।
चटकीलौ मटकीलौ जौरी प्यारी निरखत,आनंद मगन हौय निरत करा हु।
प्रकटावन वारौ नित जावू बलिही,सेवत संग गोद बैठाय हरिदास जु।
मोद मनाय हिय प्रेम बहायौ,जय जय प्राणन प्यारी सखी कू।
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