मान लीला
मान लीला
आजु लली मान ठान लीन्ही।
नीको सौ बात भई सखी री,लाल मुख बीरी नाय लीन्ही।
श्यामसुन्दर सौ मुखा चूमतौ,हम नाय अधर दीन्ही।
घाट घाट कौ पानी चाख्यो,पुनि हमहु जाद किन्ही।
झूठौ बीरी राखू न मुख सौ,कौऊ और सखी दीन्ही।
हा हा करत बैठ गयौ पायन,लली नैन न कौर किन्ही।
आजहु लाडली छमाहु करिहौ,दान नेह मोय दीन्ही।
प्यारी ठाडी मंद मुस्कावै,सखी सब चुटकी लिन्ही।
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