पीर भारी

पीर भारी
बढीही पीर अति भारी हिय कौ।
जाकौ पिव सुनिहै नाय,वाकौ पीर कासौ कहौ।
दिवस दिवस जुग बीतौ जावौ,बिरहा अगन कैसौ पीयौ।
कहवू कैसौ निरमोही वा कौ,अौगुन खान हमहु हौ।
रोवतौ नैन खौवतौ नाय,नाहि हिय अधीर हुयौ।
तबै करिहौ कर जौरि बिनती,प्यारी मोहना दरस दैहौ।

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