युगल एकत्व

युगल एकत्व
एक भई दुई रस भरी जोरी।
नवल लाडलो लाल श्याम जु,नवल श्यामा किशोरी।
अंग सुअंग मिलित ज्यो रस रंग,ज्यो रसभरी हौ पौरी।
अधर सरस धरै अधर दुई हौ,ऐकेहु मिलित है हो री।
नील पीत ज्योति एक होय रही,रस भरिहै पोरी पौरी।
ललित लडैति लाल लाडली,प्यारी सेवत चरणा कौ री।

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