अयोग्यता
अयोग्यता
आप तरू कैसौ नाथ,म्हारी नाव पुरानी जी।
लख चौरासी जनम पौरानी,जानौ नाय नवानी जी।
बिषय बिकार कौ छिद्र होइए,भरै भव कौ पाणी जी।
लहरा जलहि उठत ऊपरि,हिय डरपै जाणी जी।
ता पै न मोय खैवन अहिहौ,खेवनहार हम अनारी जी।
आप पतवार लै बनिहौ खिवैय्या,तबहि पार ह्यै जानी जी।
मैरो भरौसौ तज नाय दीजौ,ना प्यारी नाव डुबानी जी।
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