हिय वृन्दावन
हिय वृंदावन
अहिहौ हिय वृंदावन बनावौ।
जुगल धावौ हिय माही पधारौ।
हियहि करौ रसकेलि जुगल दुई।
हियही मोद अनुपम बरसावौ।
रस नाडी लता पता बनाय देओ।
प्रीती टहल कौ रस सरसावौ।
गल बहिया डारै दुई आवौ।
संग संग वृन्दावनहि लगावौ।
पुष्प खिलिहै प्रेम हिय माही।
हा! जोरि हिय ब्रज माही पधारौ।
Comments
Post a Comment