श्रीहरिदास जु गुणगान
श्री हरिदास जु गुणगान
श्री हरिदास गुण गा रै मना।
चरण गह इन्ही कौ नित ही,मेट सकल दुख घना।
सेवा अधिकार इन्ही सौ पा रै,इन्ही सौ लगाय मना।
नित ही राधा कुंज बिहारी,जानिहै ऐकौ जना।
इन आगै नैन बहत रहिहै,जुगल जोरी पाय इन्ही को च्ह्ना।
उत्सव नित कुंजन मा रहिहै,सरबस अब इन्ही कौ बना।
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