निकुँज शोभा

निकुंज शोभा
आज सखी निरख लऔ कुंजन।
कहत सुनत कैसौ बाणी आवै,सखिन सजाय कुंजन को शौभा।
मानौ पात पुष्प कौ ही,कोउ निज कर सौ हौ धौभा।
निकुंज सजायो एकौ सिंहासन,उपर ही एक छत्र सजाय।
बनाय दीयौ पुष्पन कौ छत ही,पुष्पन कौ दीवार बनाय।
कही सखी कहा सेबा करू,कछु सैबा निज दासी कौ बताय।
पकर कर सखी पाकशाला लाई,जहा सखी बहु मिष्ठान्न बनाय।
बहु प्रकार लाडू,माल पुआ,बर्फी भाँति भाँति बनाय।
देखत सखी संग मेवा कूटिये,ओखल माही सब मेवा धराए।
कूटत मेवा थाल लिजिहै,लै मावा संग लाडू बनाय।
हसि ठिठौली खूब ह्यै रही,प्यारी सखीन देख हिय हर्षाय।

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