शिक्षा
शिक्षा
राखौ धन कृपण सम जौरी।
सात तिजौरी भीतर राखै,ता पै चैन न पावै।
बैरि बैरि काढि देखत,कोउ भरौस न लावै।
ओरन सौ छिपाय राखै,आप छिपायै देखे।
ऐसेहु जौरी जुगल प्यारी,हिय ताले भीतर राखे।
ज्यौ कृपण धन घटिहै,चिन्ता ही मरी जाय।
त्यौ प्यारी जुगल होय,बिनु निरखै चैन न आय।
Comments
Post a Comment