हू तौ तृण
हू तौ तृण पर तेरौ।
प्यारौ! हू तौ तृण पर तेरौ।
होउ न होउ कछु परत न अंतर,मौ सम तौकू भतेरौ।
सम आप सौ मेरै आप एक ही,संग राखौ चहै छोरौ।
फिरू भटकत हौई विलग जो तौसो,होई दुर्गत जग मेरौ।
बाँह पकरि लौ चरण लौ राखि,करूणा नेह सौ हेरौ।
आवौ हे प्रभु !दीनबन्धौ करूणामय, "प्यारी" कब सौ टेरौ।
Comments
Post a Comment