विरहः पद

विरह पद
दरस बिनु मौ सो रह्यौ न जाय।
नैन बैर निकारतौ मौ सो,पिय काहै तरसाय।
जानती पिय निरमोही हौयौ,जान रोकती पकडत पाय।
सखी सहेली भई पराई,कौऊ मनहु नाय भाय।
इकली रहवू पिय मगन ह्यै,संग साथ छूटि जाय।
अबहु हा हा करत का हौयो,प्यारी जात रोकियो नाय।

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