रसराज
रसराज
रसमत्त रसीलौ रसराज।
सुवर्षित अधरामृत रसै,चचंल नैन सैनानी जुटै।
भुजपाश गाढालिंगनै,नव चपलता करत बढै।
उनमत्त चुंबित सर्वदिशि,रस सैनानी रणहु लडै।
बिलसै सेज रणभूमिहु,दुई जीतत हारत कौउ न पडै।
अद्भुदै रसकेलि रण,जीतै दुई शूर दुई लडै।
कर जौरि पायन बैठिहै,प्यारी दरस दौ बिनती करै।
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