विरहः पद
विरह पद
नैना जी,दैख्यौ बिनु है उदास।
देखि देखि थारौ प्यारौ बरसै,रौवै अगै थारौ दास।
काल जगह कछु नाय देखत,बहत बारहौ ही मास।
कैसो प्रेम कौ टौना डारयौ,रूकि रूकि आवै श्वास।
जोई गुण अवगुण तौहै न भावै,उनकोई करियौ नास।
गिरधर प्यारी को धाम बुलावौ,पुरावौ जनमा कौ आस।
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