रोम रोम पिय
रोम रोम पिय
ह्यै रहयौ रोम रोम पियजी,ढूंढवै जावू कितहु काय।
बौरि भयी ढूंढत ढूंढत मै,जग फिरू ढूंढत सारा।
नैन किवाडी गिराय दैखिहौ,हिय बैठ्यौ पिव प्यारा।
सुनत बैन श्रवणहु तरसै,कबहु बात न सुनीही।
मिलाय लई हिय एक करिहै,बंशी को धुनी बजीही।
जग कहवै मै हू बौरि,मै कहवू जग बौराय।
दूर देस जावन कहा पडिहै,पिय हिय आय समाय।
नैन मिलाय जबहि बैठू,प्यारौ बैठ्यौ दीखै।
प्यारी मुस्कन तन मन वारै,पिय बसिहौ हिय कौ नीकै।
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