लीला दर्शनः पद
लीला दर्शन पद
जगे भाग बुलायी लली सेबा माही।
दौडायी कुंजन सबहि सखी,प्यारी बुला लायी।
आवत बात पूछी प्यारी,लली कह मुस्कायी।
लाल सखी बीरी च्हावे,तुमसो कर लगायी।
सुनत हँसत दोरी सखीही,झट बीरी दिन्ही मुख माही।
लली कहो तो सो बीरी लगावू,लाल ना नयन मटकायी।
अधर धरत बीरी बाँटी,लली अधर पान करायी।
बलि बलि सखि इन्ही प्यारी,जिन ढूंढत मोय लायी।
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