जगिहै भाग

जगिहै भाग
जगिहै भाग अाजु सखिहै मौर।
भौरही टहल करतौ भूली,भाल रौली लगाइहै ।
लगईहै दोरि दोरि बीरी,रखिहै नागरि मुखै।
दैखिहै सूनौ माथ सखीही,श्यामा कैसौ नैह करिहै।
अधर पीक लैत पौरि,गौल बैंदि भाल रचिहै।
सबै बिसराहै सखी,कदै बैंदि नाही भूलिहै।
कहै दासी चरणन सौ बिनती,ऐसौ भाग कदहै करिहै।

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