बलिहार नैना

बलिहार नैना
बलिहार सौई नैना,जिन देखिहै जौरी।
अरस परस सखी जमुना तीरै,रंग रस भीजै रैना बीते।
बिसारै सुधि बुधि गैह नेहा,कबहु आवै भौर भान न हुते।
भौर लौ पुलीनहु बिलसे,भयौ दिवस मातु सुधि भीते।
चतुरहु राधै मातु समुझावू,तुव कहा कहिहो कहा रैन बीते।
कहिहो लाल सोई पूछिहै,जिन रैन मौरा मग रोके।
अहा! लली अति चतुर होहि,सबहु गुणै मौर लीजे।
प्रेम दरस जिन नैन पाए,दासी जा के चरण धोई पीते।

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