कालिन्दी जु कौ सेवा

कालिंदि जु कौ सेवा
लगाय कान सुनिहै कालिंदि जु कौ सैवा।
हिय दुई रंग रस मोद जबै हौवतै,ह्लादिनि तरंग मोद बढावती।
बडै जमुनाजु जबै दुई कर पकरत,अंग कौ कैसर चंदनौ बहावती।
कछु दूरि जाय धारा जैसौ एक मिलिहै,तैसौहि मिलन कौ मौद बढावती।
प्रेम रस रचे पचे अंग सुअंगै,दैखिहि तरंग जल तरंग मिलि धावती।
झीनै झौरे बसन अंग ज्यौ चिपटिहै,त्यौहि हिय दुई एक हौवनौ च्ह्वाती।
ऐसौ सैबा करिहु कौ हियहु मचलै,ऐसौ ही टहल दासी सखी सौ मांगती।

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