कुँज क्षेत्र

कुंज क्षेत्र
कुंज क्षेत्र रसराज नित नव चाव जौरी हिय जगावतौ।
एकौ तमाल कनक बेलि लिपटि रस तरंग कैसौ जिय उठावतौ।
सर कुमुद नील कमल खिलिकै पीत कमल भ्रमर मंडरावतौ।
जल चाव नयौ मिलाय छबि दुई दुईन कौ एकहु करन चाह्वतौ।
पंख पिच्छ मयूर नृतन सुंदर कैसी लटकनि कटि स्पर्श सुधावतौ।
पुष्प अनार रक्त दैखिहौ अधर पिक रंग अधर मिलन जावतौ।
कणि कणि मिलानौ सहज टहल रस बढावन लगिन रहवतौ।
होय ऐसौ कुंज रसराज कणिका दासी टहल मिलन करावतौ

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