मान मनावती
सखी हौ सहेली मान मनावती हारी हौ।
नेक न पसीजै हिय काहै गिरधारी कौ।
मान करू ऐसौ हिय पाऊ कही मिलै जौ।
रूठ रूठ तौकू रै बड्यौ ही छकावू हौ।
करिहै कछु या कछु किजिए जतन तुव।
नेक न निहारू नाहि तजु मान प्यारै सौ।
ढूंढी री भतैरी नाय मिलिहौ हिय ऐसौ।
रूप श्याम दैखिकै बिसारै नाहि सुधि हौ।
हाय ! री चबक जैहि रह रह उठि हिय।
कहा करू आन मिलै पियही प्यारी सौ।

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