दरस बिनती
दरस बिनती
दरस देओ अबकी बेर हे हरि।
बड्यौ दिनन सौ भटकत घूम्यौ,अब मूरखताई टरी।
जनम भतेरे बिनु आप गमायौ,अबहु गमायौ नही।
दूज्यै ठौर नाय भैज्यौ मौहै,दासी तुव चरणा सौ गही।
कहो जौ नाथ कहि ओरहु जावौ,बिनु आप कहा मोरी बनी।
प्यारी राखौ निज चरण लपटायौ,दास मलिक अजहु ठनी।
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