युगल एक भये

युगल एक भए
प्रकट भई आजु जुगल जोरी।
रूप रंग ऐकैहु ऐक,ऐकेहु देह हौ री।
कबहु झलक लाल लाडलौ,कबहु लाडली लली कौ मारै।
कबहु बंशी सजावत कर सौ,कबहु कमल साजत न्यारै।
मुस्कन अधर ऐकहु हौवत,ऐकहु दैह ऐक प्राण होहि।
चरण शीश नवावत प्यारी,झुकावत हिय जोरी कौ ही।

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