प्रेम वितरण

प्रेम वितरण
देवती सखी जौ हते झोरे जुगल।
पावती जा दिन सबही बाँटती।
प्रेम प्रेेम करि हाँक लगाती।
कहती सबही बात रात कौ।
बात पिय को सबहि सुनाती।
पा जौ जावती सुन सखी री।
लै संग सखियन मैल कराती।
हसी कबहु ठीठोली करती।
कबहु संग प्यारी रास रचाती।

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