जगत छाडि

जगत छाडि
जगत छाडि जगपति सौ लगावू।
साँचो पति पावू सखी री,झूठौ संग गवावू।
बिरह अगन मिटावू अबही,मिलन संग रचावू।
सुरतिया प्यारी हिय बसाय,नैनन बलिहि जावू।
निरखू रैन दिनन छबि प्यारी,सुधि सगरीही बिसरावू।
आय मिलौ घनश्याम साँवरौ,कद सौ टेर लगावू।

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