निंदिया
निंदिया
कैसेहु आय गयौ पिय बिनु निंदिया।
खौवती जागती जादहु मारी,बैरिन आय गयी नैन हमारी।
अरी बैरन कहा सुख तैने पायौ,पिय नाहि जाद लियै न जा री।
धन मम निर्धन जाद पिय कौ,काहै मोहै दरद सौ रीती डारी।
कछु कह काहै मुख नाय खौले,ऐसौ करन कु पिय तौ न कहरी।
जागतौ रैन कही पिय न जगाती,तबहु तौहै मौरै नैना बैठारी।
मिलिहै पिय कहिहौ मौरै मन की,सुपनेहु आय मिलै मुरारी।
प्यारी कहै लाड लडौवन करिहै,काहै तजि निज प्राणन प्यारी
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