उनीदौ नैना
उनींदौ नैना
नाहि आयौ नैन निंदिया,नैना उनींदौ सौ।
रैनहु जागत पिय मग जौहवत,नाहि आबत दीखौ सौ।
भारहु पलकि झुकैहु नींद बोझि,नाहि पलकनि मिलि हौ।
आवै प्रिये सौबति दैखि,नाहि कदै लौटै जायी पुनि लौ।
सैजि लौटि लौटि बिखरू,फैरि फैरि दैखू कर सौ।
दैखहु चित्र प्रीत प्रीतमहु,सिराहनौ समुझी पिय हौ।
जरत अंगै अंगै बिन तौहरे,कैसौ कहवू लिपटानि अंग कौ।
नाय पुकारू पुकारू प्रीतम,रहवै जावत नाहि बनै हौ।
करिहौ तुव तुव ही किरपा,दासी थाकी मांदी कहवतौ।
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