भरपाई नेहा लगाए
भरपाई नेहा लगाय
ब्रजराज!भरपाई तौ सौ नेहा लगाय।
कौन घडी नैनहु तौ सौ मिलाय,सब गमायी हौ तौ सौ नैन मिलाय।
कौन जनम बैर विधना किन्है,प्रीत जुल्मी सौ लगाई हौ कैसौ जावै निभाय।
हिय पीर दिखै नाही तौ कू,कौनहु दिखावू हौ तौ नाहि दैखिऐ आय।
दैवू उलाहनौ दीयौ नाहि जावै,दौष आपनौ गिनायी हौ तौ सौ कछु ना कहाय।
कौन टौना तैने बैरी मौपै डारौ,रार करवै ना पायी हौ तौ संग नेकहु आय।
तौरि दती जौई तागा हौतिही,प्रीत तौरी ना जावौ तौ ऐसौ लयौ फसाय।
झूठी साँची रार प्यारी करिहै,नाय आवै रूसाई हौ कैसौ करू लडाय।
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