छैडी प्यारी
छैडि प्यारी
पुष्पमाल बनाहै सखिन छैडि प्यारी कौ।
कछु कहवौ तौ कदै छैडि कहा तौहै नंदकुमर नै री।
लजा अतिहि झुकाहै नयन नाहि कहवै मौन भौरि री।
काहै सखि अति मानहु करिहै हमसौ काहै छिपावै री।
कदै बीरी लैहै चरण पलौैटै बीजण झलिहै संगे कुंजन री।
निकुंज दासी हमहु तैनेही करि राखी बनाही री।
अबै काहै प्रेम चिह्न हमसौ मारि लाजि छिपावै री।
सुनि बैन नैनहु उठायी राधै सखी नैनहु दीखावै री।
तू जानै सबै अरी चतुरि सखी मौरै मुख सौ कहावै री।
हसि हसि ठिठोली करिहि सखिया राधै मोद बढावै री।
कबहु जगिहै भाग अभाग कै दरस ऐसौ पावै री।
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