श्यामा रौवै
श्यामा रौवे
बिदा करिहै आपु प्राण,बैठिहि श्यामा रौवै।
आपहु कहि जावौ जु,जबै कहतौ नाहि दैखै।
जानतौ पिय पीर प्यारी,जावू कहतौ नाहि बनै।
करिहि विदा अधरि हसि,नैन जलौ भीतर भरै।
आवनौ पिय बैगिहि,मुख सौ कहत जै ही बनै।
दूरि लौ मुडी मुडीहि दैखी,जात पियहि भूमि गिरै।
थामतौ जल बहहि आयौ,एक अश्रु सौ सौ बहै।
प्रियसुखहि सुखि हौहिहै,ऐसी प्रियाहि श्यामा हौहै।
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