बहत नैन

बहत नैन
बहत नैन बिनु गिरधर।
डार सो बिलग पुष्प सम होहि,बिनु पिय प्राण अधारे।
देखत समय ठौर नाय देखत,बहत नैन पतनारे।
दिवस रैन कछु नाय सूझत,सूझै मिलू कैसो प्राणन प्यारै।
आप बिनु नाय भावै कछु हौ,कौउ नाय संग हमारे।
आय मिलो घनश्याम साँवरौ,प्यारी प्राण उडि जावै न बिचारै।

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