भलि होई

भलि हौई
भलि हौई प्राण जौई निकरै न तन सौ।
निकरि जावतौ पिय आवतौ,कहा करतौ अधीर हौतौ।
मरी मरी नाय उठी सकै तौ,कैसौ धरती मरी धीर जीवतौ।
रौबतौ कैसौ बहवतौ नैनौ,दैख सकतौ पिय नैन बहवतौ।
हाय! मरी जाती कैसेहु संवारती,पिय प्यारी कौ हिरकतौ।
शीतल दैह तौ अंग लगावौ,पिय हिय बड्यौ जरावतौ।
भलि भलि हौई रूकेहु रहै,नेक आवनौ लौ पियकौ।
पग पकरि करेहु बिनती,कछु सुखै साँवरौ च्हावतौ।
सुखै सौई कौ बलि हौई उनपेई,पाछै मरनौ चाहै हौवतौ।

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