बिरह जानिए
बिरह जानिये
बिरह बिरह कहत सबहि,बिरह जानिहै कौन।
बिन पियु लेवन श्वास ना भावै,जरावै शीतल पौन।
चंद्र किरण शीतल अंग गडिहै,कंठ सूख्यौ हौन।
जार जार ह्रदय होहि जावै,भावै हसन नाहि रौन।
कबहु पवन संग बतियावै,कबहु पिय बिनु कछु न होन।
ऐसो बिरहा प्यारी कौ सतावै,आय मिलो पिय प्यारी दोन।
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