चेतावनी पद

चेतावनी पद
शीश धरी गठरी छाडि जरा।
भाति भाति नेह बंध जोडिए,शीश गठरी बाँध धरा।
विषय काम मद मोह बांधिए,शीश सजा लीन्ही।
प्रेम चोगा धारि उपर,तिलक भाल दीन्ही।
पीट ढिंढोरा प्रीत झूठी को,अपनी ही किन्ही।
ऐसे प्रेमी भरमत आपे,जग भरमत लीन्ही।
च्यो रे प्यारी मूरख जग मा,नट सी निरत किन्ही।

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